….शिवाये…..


महादेव
मैं करना चाहती हूँ
आपकी आराधना
सम्पूर्ण विधि विधान के संग…

भस्म आरती में शामिल हो मैं
करना चाहती हूँ
आपकी आरती…

भांग धतूरा पुष्प बेल पत्र
अर्पित कर तुम्हारे चरणों में मैं
मुग्ध होना चाहती हूँ
तुम्हारी भक्ति में…

कहते हैं
ये आपकी रात्रि है
आज आपका द्वार खुला है
हम सब के ख़ातिर
देगें आप आज हमें
हमारी माँगी हुई हर मुराद
तो निधि माँगती है आपसे आज
लौटा दो आप मुझे
आपकी आराधना करने का हक
खत्म कर दो ये न पूजने का निषेध…

मैं रहना चाहती हूँ
आपके शरण में…

बचपन के आराध्य हैं मेरे आप महादेव
हर पल आपको ही पुकारा
खोया पाया सब कहा सब सुना
कैसे अब न कहूँ कुछ
कैसे न पूजूं आपको…

मुझे आपकी आराधना करनी
बिन निषेध ह्रदय संग…

लौटा दो महादेव मुझे
मेरे महादेव की आराधना
करने दो मुझे आपकी सेवा…

रुद्राक्ष की माला पहन मैं
सजना चाहती हूँ
भस्म मल अपने बदन में मैं
श्रृंगार करना चाहती हूँ…

रह कर तुम्हारी चरणों में
विरक्त बन मैं
एक वैरागी सा जीना चाहती हूँ…

तोड़ हर बन्धन को मैं
आपकी भक्ति में
रहना चाहती हूँ मैं…

बहुत कुछ
छिनता गया है मुझसे महादेव
किन्तु आपकी आराधना निषेध होना
जैसे सब कुछ छिन गया हो मुझसे…

मैं श्मशान में
अर्धजली लाशों में रह
हर मोह हर बन्धन से मुक्त होना चाहती हूँ…

नही बन्धना चाहती हूँ मैं
परिग्रहण संस्कार में
नही जीना चाहती हूँ मैं
किसी के आकर्षण में
मुग्ध होना चाहती हूँ मैं
आपके वैराग्य में….

महादेव बनारस घाट

आना चाहती हूँ मैं

चार कांधे में….

तांडव स्त्रोत में मैं

मग्न हो झूमना चाहती हूं….

खत्म कर दो मुझे महादेव
ये निषेध….!!!🍁

#Ziddynidhi

6 thoughts on “….शिवाये…..”

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